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अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक,एनएसटीएफडीसीकेडेस्कसे

गुर सरुप सूद, आई डी ए एस,

अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक

राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास निगम (एन.एस.टी.एफ.डी.सी.) जनजातीय कार्य मंत्रालय के अन्तर्गत अनुसूचित जनजातियों को वित्तीय सहायता प्रदान करने वाला एक शीर्ष संस्थान है। इस निगम की स्थापना अप्रैल, 2001 में अनुसूचित जनजातियों के आर्थिक उत्थान को ध्यान में रखते हुए की गई। एन.एस.टी.एफ.डी.सी. गरीबी रेखा सीमा से दुगुनी पारिवारिक आय रखने वाले आदिवासियों को रियायती ब्याज दरों पर वित्तीय सहायता उपलब्ध कराता है, जो 4% से 8% के बीच अलग अलग होता है।

एन.एस.टी.एफ.डी.सी. की वित्तीय सहायता अनेक योजनाओं के अन्तर्गत दी जाती है। इनमें से एन.एस.टी.एफ.डी.सी. की एक मुख्य योजना आदिवासी महिला सशक्तिकरण योजना है, जिसका मुख्य उद्देश्य आदिवासी महिलाओं का सशक्तिकरण है। इसके अन्तर्गत उन परियोजनाओं, जिनकी लागत 50,000 रुपए तक है, को 4% प्रतिवर्ष उच्च रियायती ब्याज दरों पर वित्तीय सहायता दी जाती है। लघु ऋण योजना के अन्तर्गत स्व सहायता समूहों को भी सहायता प्रदान की जाती है। इस योजना के अन्तर्गत प्रति सदस्य 35000 रुपए की प्रतिबन्धित सीमा के साथ प्रति स्व-सहायता समूह अधिकतम 5.00 लाख रुपए का ऋण दिया जाता है। इसके अतिरिक्त एन.एस.टी.एफ.डी.सी. के पास मियादी ऋण एवं विपणन समर्थन सहायता योजनाएं है, इन योजनाओं एवं अन्य योजनाओं का ब्यौरा वेबसाइट पर उपलब्ध है।

वे आदिवासी, जो पात्रता मानदंड को पूरा करते हैं, रियायती वित्तीय सहायता लेने हेतु राज्य स्तर की चैनेलाइजिंग एजेंसियों से संपर्क कर सकते हैं। राज्य स्तर की चैनेलाइजिंग एजेंसियों का राज्यवार संपर्क सूत्रों का ब्यौरा वेबसाइट पर उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त एन.एस.टी.एफ.डी.सी. ने पांच सार्वजनिक उपक्रम बैकों नामतः देना बैंक, यूको बैंक, सिंडिकेट बैंक, विजया बैंक एवं यूनियन बैंक ऑफ इंडिया एवं पाँच क्षेत्रीय ग्रामीण बैकों नामतः वनांचल ग्रामीण बैंक, त्रिपुरा ग्रामीण बैंक, असम ग्रामीण बैंक एवं बड़ौदा गुजरात ग्रामीण बैंक तथा देना गुजरात ग्रामीण बैंक के साथ अनुबंध किया है। वे आदिवासी, जो एन.एस.टी.एफ.डी.सी. के रियायती वित्तीय सहायता का लाभ लेना चाहते हैं, इन बैकों की शाखाओं से संपर्क कर सकते हैं।

एन.एस.टी.एफ.डी.सी., योजनाओं हेतु जमीनी स्तर पर वित्तीय सहायता उपलब्ध कराता है। अनुसूचित जनजातियों द्वारा कुछ सफलतापूर्वक कार्यान्वित योजनाओं के नाम इस प्रकार है - टेलरिंग, ढ़ाबा, प्रोविजनल स्टोर, फर्नीचर की दुकान, ब्यूटी पार्लर, सुअर पालन, डेयरी, मुर्गी पालन, गेस्ट हाउस कम लॉज, पेडी हस्किंग एवं सब्जी की खेती इत्यादि। यह केवल एक सांकेतिक सूची है और कोई भी व्यवहार्य आयजनित गतिविधि हेतु एन.एस.टी.एफ.डी.सी. से सहायता ली जा सकती है।
निगम लगातार आदिवासियों के बीच जागरुकता उत्पन्न करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। इस उद्देश्य हेतु निगम ने कई क्षेत्रीय एवं आदिवासी भाषाओं में मार्गदशिकाएँ प्रकाशित की हैं। एन.एस.टी.एफ.डी.सी. क्षेत्रीय अखबारों में अपने कार्यक्रमों के बारे में विज्ञापन भी प्रकाशित करता है। इसके अतिरिक्त, निगम ने ट्राईफेड के साथ मिलकर राष्ट्रीय साक्षरता मिशन प्राधिकरण, प्रौढ़ शिक्षा निदेशालय, मानव संसाधन विकास मंत्रालय के साथ त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया है। इस व्यवस्था के अन्तर्गत प्रौढ़ शिक्षा निदेशालय के जनशिक्षण संस्थानों द्वारा प्रशिक्षित अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवार एन.एस.टी.एफ.डी.सी. से वित्तीय सहायता लेने के पात्र बन जाएंगे। आदिवासियों के बीच जागरुकता संचार एवं उन्हें वित्त प्रदान करने हेतु विकास आयुक्त कार्यालय, हस्तशिल्प एवं रोजगार महानिदेशालय एवं प्रशिक्षण कार्यालय के साथ भी कार्यात्मक व्यवस्था की गई है।

अभी तक निगम ने व्यवहार्य आयजनित योजनाओं के अन्तर्गत 3 लाख से अधिक आदिवासी लाभार्थियों को करीब 900 करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता मंजूर की है। इस निगम ने अगले 20 वर्षों में कम से कम 50 लाख आदिवासी परिवारों को लाभ पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य बनाया है। इस संबंध में निगम ने अनुकूल कार्य योजना बनाने हेतु एक प्रतिष्ठित संगठन को अध्ययन का कार्य सौंपा है। इससे निकट भविष्य में जरुरतमंद आदिवासियों को अधिक संख्या में लाभ पहुंचाने के लिए एन.एस.टी.एफ.डी.सी. के प्रयासों में मार्गदर्शन प्राप्त होगा।

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By: PWT& FD